Total Pageviews

Monday, August 22, 2011

अन्ना का बलिदान //जाग उठा है हिंदुस्तान




जाग उठा है हिंदुस्तान।
सबके दिल में इक तूफान, अब तो मंजिल है आसान
जाग उठा है हिंदुस्तान।

बहुत दिनों तक थे हम सोए
भूल-भुलैया में थे हम खोए
नियमों का जकड़ा जंजाल
पार हुआ जो चल गया चाल
सिंहासन पर सब बेईमान, ये तो नहीं अपनी पहचान!
जाग उठा है हिंदुस्तान।

लात मारते पेट-पीठ पर
बने कसाई बैठ सीट पर
संविधान की दे-दे दुहाई
खा जाते सब पाई-पाई
तरस रही जनता नादान, कैसे मिले मुट्ठी भर धान?
जाग उठा है हिंदुस्तान।

प्रथम सभ्यता ज्ञाता भारत
जग का भाग्य विधाता भारत
फंसा हुआ चंगुल में ऐसे
चूजा चील के मुंह में जैसे
नोंच-नोंच खाएं शैतान कहां रही भारत की शान?
जाग उठा है हिंदुस्तान।

उठो चलो अब बहुत सो लिए
आंसू पोंछो बहुत रो लिए
अब जनता का राज चलेगा
नौकर मालिक नहीं बनेगा
क्या व्यर्थ होगा बलिदान? राक्षस बना रहेगा भगवान?
जाग उठा है हिंदुस्तान।

सबके दिल में इक तूफान, अब तो मंजिल है आसान
जाग उठा है हिंदुस्तान।