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Saturday, August 6, 2011

तेरी झलक .

अब कोई खयाल भी आता नहीं खयालों में

जब से समाया है तेरा खयाल मेरे खयालों में

इक जूनून सा तारी है दिल के आलम पर

तेरी ही चाह अब रहती है हर सवालों में

जमीं से आसमां तक फैला है एहसास तेरा

झलक तेरी ही नजर आती है हर उजालों में

बंद ऑंखों में भी दिखती है सूरत तेरी

तेरी ही बंदगी है मेरे हर आमालों में

सुकून पाता है 'क़मर' बज्म में तेरी आकर

वरना खो गया होता गम के अंधियालों में।

5 comments:

  1. जमीं से आसमां तक फैला है एहसास तेरा

    झलक तेरी ही नजर आती है हर उजालों में

    वाह बहुत सुन्दर ... मेरी रचना पर अपनी सुन्दर पंक्तियाँ प्रेषित कीं ..शुक्रिया

    एक निवेदन ... अपने ब्लॉग पर फॉलोअर का गैजेट लगाएं ..जिससे आपके ब्लॉग तक पहुंचना आसान होगा

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  2. ओह ...क्षमा कीजियेगा .. फौलोअर का गैजेट दिखा ही नहीं था ... मैंने फौलो कर लिया है

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  3. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 11 - 08 - 2011 को यहाँ भी है

    नयी पुरानी हल चल में आज- समंदर इतना खारा क्यों है -

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  4. जमीं से आसमां तक फैला है एहसास तेरा

    झलक तेरी ही नजर आती है हर उजालों में
    bahut khoob

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