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Monday, February 21, 2011

नेता की प्रिया

कवियों को आंखें झील सी वैभवशाली दिखती हैं
झूठे हैं वे, तो ये काली-काली मतवाली दिखती हैं
मधु को प्यासों को यह मदिरालय दिखती हैं
मुझको यह स्विस बैंक की मुख्यालय दिखती हैं
तेरी इन आंखों में काले धन का है स्वर्णिम जाल
एक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल।
इंटरेस्ट में मिली है जो तेरे होठों की मुस्कान
जाग उठा जीवन मेरा ज्यों पाई मुर्दे ने जान
इनके काले-काले रंगों में रंग गया है मन मेरा
अब ने इस जीवन में होगा दूजे रंग का बसेरा
तू ही बता तुझ पर मैं क्या-क्या न्यौछावर कर दूं
दिल करता है देश समूचा तेरे खाते में धर दूं।

5 comments:

  1. शुभागमन...!
    हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसके दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । शुभकामनाओं सहित...
    http://najariya.blogspot.com

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  2. "तू ही बता तुझ पर मैं क्या-क्या न्यौछावर कर दूं
    दिल करता है देश समूचा तेरे खाते में धर दूं"

    यही हो भी रहा है - साधुवाद

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  3. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  4. वाह...........बहुत खूब!
    दिल करता है देश समूचा तेरे खाते में धर दूं"

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  5. " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप को तथा आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामना. यहाँ भी आयें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो फालोवर अवश्य बने .साथ ही अपने सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ . हमारा पता है ... www.upkhabar.in

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