Total Pageviews

Monday, February 21, 2011

नेता से साक्षात्कार

देखकर देश की हालत एक दिन आया एक विचार
चल कर एक दिन नेताजी का ले लें साक्षात्कार
मैंने पूछा नेताजी बात अंतर्मन की बताइए
जरा इन घोटालों का सिध्दांत तो समझाइए
नेता जी शांत भाव से बोले, अपना राजे दिल खोले
आप ठहरे साहित्यकार और पत्रकार
क्या जाने कैसे चलती है सरकार
हमारे ऊपर देश के विकास का भार है
घोटाला सिध्दांत इसका सबसे बड़ा आधार है
आप को पता नहीं हम देश के विकास का पारा ऊपर चढ़ा रहे हैं
घोटाला कर-करके देश का प्रतिव्यक्ति आय बढ़ा रहे हैं
हम जनता के प्रतिनिधि हैं जनता की नब्ज समझते हैं
इसीलिए जनता के हित सब घोटाला करते हैं
हमारी जनता आलसी है स्वयं नहीं कुछ करती है
देख तरक्की पास-पड़ोस की तभी वह आगे बढ़ती है
आप सोचते हैं हम अपने खाते में जोड़ बढ़ा रहे हैं
अरे, हम तो देखा-देखी आगे बढ़ने की होड़ लगा रहे हैं
हमारी ही तरह जब हर नागरिक आगे बढ़ जाएगा
हमारी तरह जब हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बन जाएगा
हमारा देश अपने आप ही विकसित देश बन जाएगा।
हमारा देश अपने आप ही विकसित देश बन जाएगा।

No comments:

Post a Comment