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Monday, December 13, 2010

तेरा रूप

किलकारियों से भरे ऑंगन सी लगती हो

ऑंखों में बसे हुए ऑंजन सी लगती हो

मस्ती में झूम रहे फूलों को चूम रहे

बगिया के भँवरे की गुंजन सी लगती हो

झूम उठती हो तबस्सुम की बाँहों में जब

दूब पर मचलती हुई शबनम सी लगती हो।

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