Total Pageviews

Monday, December 13, 2010

बिहार में बाढ़

कोसी ने कोसों तक लील लिया गाँव को

पंछी के छाँव को , जीवन के ठाँव को

दूर तक देखो जहाँ, पानी ही पानी है

डूबे ये आशियाँ कहते दर्द की कहानी हैं

डूब गए खेत सब डूब गई साँस भी

डूब गई सपनों में जीने की आस भी

No comments:

Post a Comment