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Monday, December 13, 2010

तू सोलह की हो ली

हालत ये देखकर तेरी भोली भोली

लगता है जैसे तू सोलह की हो ली

पलकें ये कहती हैं दिल में छुपाऊँ

दिल ये कहता है सासों में बसाऊँ

चितवन हो गई है कितनी शरमीली

लगता है जैसे तू सोलह की हो ली

रातों को जागे है मीठे सपनों में खोए

मनवा तेरा अब न एक पल भी सोए

धड़कन हर पल ढूँढ़े अपनी हमजोली

लगता है जैसे तू सोलह की हो ली

दिल बना दुश्मन अब हर पल सताए

शिकायत भी उसकी जुबाँ पे न आए

भींग गया तन मन है खेली जैसे होली

लगता है जैसे तू सोलह की हो ली

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