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Monday, December 13, 2010

प्रथम सुमन

बगिया के तुम प्रथम सुमन सौरभ से जग महकाना

सब जगह भागम-भाग मची है

जग-जंगल में आग लगी है

     जलते जग पर बादल बन तुम प्रेम सुधा बरसाना

          बगिया के तुम प्रथम सुमन सौरभ से जग महकाना

इतने वर्षों तक जिसने तुमको पाला पोसा

उसकी ऑंखों में देखो,तुमसे है एक भरोसा

     तन-मन अर्पित कर तुम उसकी आन बचाना

         बगिया के तुम प्रथम सुमन सौरभ से जग महकाना

उच्च शिखर आह्वान कर रहा

नवोदय भी यही जोश भर रहा

है कर्मभूमि यह कर्म करो, कहीं स्वप्नों में न रह जाना।

बगिया के तुम प्रथम सुमन सौरभ से जग महकाना

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