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Monday, December 13, 2010

राम रतन की लूट है

राम रतन की लूट है लूट सके तो लूट!

दुकानदार हर मेल में लूटे

चालाकी से सेल में लूटे

थानेदार भी जेल में लूटे

मंत्री खेल-खेल में लूटे

         क्यों चिल्लाता बेवकूफ सा ' किस्मत गई है फूट'

         अरे! राम रतन की लूट है लूट सके तो लूट!

हर दफ्तर में बाबू लूटे

साहब तो बेकाबू लूटे

जज साहब भी चैन से लूटे

हर कोई जेंटिलमैन सा लूटे

         कलयुग के सब संन्यासी भी भला क्यों जाएँ छूट ?

         अरे! राम रतन की लूट है लूट सके तो लूट!

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