Total Pageviews

Monday, December 13, 2010

आ गया नव वर्ष

ले बहारों की उमंगे आया है नव वर्ष।

उठती -उठती ये तरंगे लाया है नव वर्ष।

एक नए उल्लास से गाकर नया एक गीत,

जोड़ लो अपने सुरों को प्रकृति देती संगीत,

भर लो जीवन की लहर में एक नया उत्कर्ष।

ले बहारों की उमंगे आया है नव वर्ष,

 

जिन्दगी के सफर में कभी न हिम्मत हार,

गर तुम्हारी नाव आकर फँस गई मँझधार,

देखो किनारा पास कितना दे रहा ललकार,

देखते क्या हो उठाओ एक नई पतवार।

हौसले से जीत लोगे जीवन का यह संघर्ष।

भर लो जीवन की लहर में एक नया उत्कर्ष।

ले बहारों की उमंगे आया है नव वर्ष।

 

जोड़ लो तुम हर हृदय से अपने मन की प्रीति,

गर मिटाना चाहते हो अपने अंतस की भीति,

क्या मिटा पाएगा है तुमको यह निष्ठुर संसार,

यदि स्वयं उनके लिए मिटने को  तुम तैयार,

लोग तुमसे जुड़ ही जाएँगें आकर सहर्ष।

भर लो जीवन की लहर में एक नया उत्कर्ष।

ले बहारों की उमंगे आया है नव वर्ष।

 

हर घड़ी मंगल घड़ी है,जीत द्वारे पर खड़ी है,

खोल उठकर द्वार अब,बीच में बस एक कड़ी है,

बैठकर बेकार में भाग्य को क्या कोसते हो?

जागो उठो अब, बैठकर यूँ भला क्या सोचते हो?

ऐसा सुनहरा अवसर तुम पाओगे नहीं प्रतिवर्ष।

भर लो जीवन की लहर में एक नया उत्कर्ष।

ले बहारों की उमंगे आया है नव वर्ष।     

No comments:

Post a Comment