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Monday, December 13, 2010

परिवर्तन

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

तिनका-तिनका चुनकर घर प्यारा सा एक बनाया,

निठुर हवा के झोंके ने एक पल में सब बिखराया,

फिर चोंच में दाबी तिनका, चिड़िया हार न मानी।

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

 

रात की काली ऍंधियारी ने सूरज का साम्राज्य लिया,

प्रात हुई फिर सूरज ने नव किरणों से शृंगार किया,

मुरझाए फूलों के अधर कहते फिर  नई कहानी

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

 

कल-कल करती सरिता चट्टानों से टकराती,

गिरती उठती रहती पर कितनी वेगवती बन जाती,

ऊँचे पर्वत से गिरकर गाते झरनों की देखो रवानी।

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

 

उथल-पुथल जीवन की गति, इससे क्या घबराना,

पतझर बीता, फिर उपवन ने पहना सुंदर बाना,           

भ्रमर करे गुंजार पुन:, कोयल कूके मधुरी बानी।

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

 

रोती ऑंखों को जग ने चाहा है और रुलाना,

ऐसे जग को दिखलाने को क्यों है अश्रु बहाना!

परिवर्तन है नियम प्रकृति का, फिर क्यों हार है मानी ?

काँटों में रहकर हँसते सुमनों की लिखो कहानी।

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