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Monday, December 13, 2010

मेरा भारत है कितना महान!

मेरा भारत है कितना महान!

प्रथम सभ्यता ज्ञाता है यह

जग का भाग्य विधाता है यह

इसी भूमि ने दिया है सबको मानवता का वरदान।

मेरा भारत है कितना महान! 

परोपकार को ध्येय विचारा

इच्छाओं से कभी न हारा

जनहित में इसने ही दिया है, निज अस्थि का दान।

मेरा भारत है कितना महान! 

जनता के लिए है तंत्र हमारा,

'सिर्फ मैं जनता' अब मंत्र हमारा,

जो जनता का, सब मेरा हो, यही तो सच्चा ज्ञान।

मेरा भारत है कितना महान? 

महल दमकते हैं मस्ती में,

आग लगी है हर बस्ती में,

गाँव का होरी आज भी कब, कर पाता है गोदान?

मेरा भारत है कितना

झाड़ उगे थे, पेड़ हो गए,

सिंह बने जो, भेड़ हो गए,

ऑंख पर पट्टी बाँधे चल रहे, निज दृष्टि से अनजान।

मेरा भारत है कितना महान? 

खाना  भी लिया, कपड़ा भी लिया,

भाषा-बोली, सब उधार लिया,

उनसे ही तो व्यवहार लिया,

अब क्या अस्तिस्व, क्या मान?

मेरा भारत है कितना महान?

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